सोमवार, 4 जून 2012

घुमन्‍तु बाबा बराबर की पहाडिंयों में



बराबर गुफाएं भारत में चट्टानों को काटकर बनायी गयी सबसे पुरानी गुफाएं हैंजिनमें से ज्यादातर का संबंध मौर्य काल (322-185 ईसा पूर्व) से है और कुछ में अशोक के शिलालेखों को देखा जा सकता है; ये गुफाएं भारत के बिहार राज्य के जहानाबाद जिले में गया से 24 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं.
ये गुफाएं बराबर (चार गुफाएं) और नागार्जुनी (तीन गुफाएं) की जुड़वां पहाड़ियों में स्थित हैं - 1.6 किमी दूर स्थित नागार्जुनी पहाड़ी की गुफाओं को कभी-कभी नागार्जुनी गुफाएं मान लिया जाता है. चट्टानों को काटकर बनाए गए ये कक्ष अशोक (आर. 273 ईसा पूर्व से 232 ईसा पूर्व) और उनके पुत्र दशरथ के मौर्य काल, तीसरी सदी ईसा पूर्व से संबंधित हैं. यद्यपि वे स्वयं बौद्ध थे लेकिन एक धार्मिक सहिष्णुता की नीति के तहत उन्होंनेविभिन्न जैन संप्रदायों की पनपने का अवसर दिया. इन गुफाओं का उपयोग आजीविका संप्रदाय के संन्यासियों द्वारा किया गया था जिनकी स्थापना मक्खाली गोसाला द्वारा की गयी थी, वे बौद्ध धर्म के संस्थापक सिद्धार्थ गौतम और जैन धर्म के अंतिम एवं 24वें तीर्थंकर महावीर के समकालीन थे. इसके अलावा इस स्थान पर चट्टानों से निर्मित कई बौद्ध और हिंदू मूर्तियां भी पायी गयी हैं.
ई.एम. फोर्स्टर की पुस्तक, ए पैसेज ऑफ इंडिया भी इसी क्षेत्र को आधारित कर लिखी गयी है, जबकि गुफाएं स्वयं पुस्तक के सांकेतिक मूल में एक महत्वपूर्ण, यद्यपि अस्पष्ट दृश्य के घटनास्थल के रूप में हैं. लेखक ने इस स्थल का दौरा किया था और बाद में अपनी पुस्तक में मारबार गुफाओं के रूप में इनका इस्तेमाल किया था.
बराबर में ज्यादातर गुफाएं दो कक्षों की बनी हैं जिन्हें पूरी तरह से ग्रेनाईट को तराशकर बनाया गया है जिनमें एक उच्च-स्तरीय पॉलिश युक्त आतंरिक सतह और गूंज का रोमांचक प्रभाव मौजूद है. पहला कक्ष उपासकों के लिए एक बड़े आयताकार हॉल में एकत्र होने के इरादे से बनाया गया था और दूसरा एक छोटा, गोलाकार, गुम्बदयुक्त कक्ष पूजा के लिए था, इस अंदरूनी कक्ष की संरचना कुछ स्थानों पर संभवतः एक छोटे स्तूप की तरह थी, हालांकि ये अब खाली हैं.


बराबर पहाड पर का प्राकुति नजरा 

बराबर पहाड की चोटी पर बना बाबा सिदनाथ का मन्दिर 


बराबर पहाड में एक गुफा का फोटु 


चलो इसको उठाते है 

बराबर पहाड से एक नजरा 

बराबर के पहाडियों में बना गफा के दरवाजे पर लिखा गया अशोक कालिन लिपी 

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