शुक्रवार, 27 अप्रैल 2012

सौर ऊर्जा (Solar Energy)


सूर्य ऊर्जा का प्राथमिक स्रोत है और इस स्रोत से प्राप्त ऊर्जा को सौर ऊर्जा के नाम से जाना जाता है। आदिकाल से मानव सौर ऊर्जा का प्रयोग करता चला आ रहा है। गीले कपड़ों को धूप में सुखाना, शीतकाल में धूप तापना आदि मनुष्य के द्वारा सौर ऊर्जा के प्रयोग करने के ही उदाहरण हैं।
विभिन्न वनस्पति तो सौर ऊर्जा पर ही निर्भर होते हैं, सौर ऊर्जा के द्वारा ही उन्हें भोजन की प्राप्ति होती है। ये वनस्पतियाँ ही अनेक पशुओं का भोजन बनती है, इस प्रकार से कहा जा सकता है कि पशु-पक्षी भी सौर ऊर्जा पर निर्भर हैं। हजारों-लाखों साल पहले जो पेड़-पौधे भूकम्प आदि जैसे प्राकृतिक क्रियाओं के कारण जमीन के भीतर दब गए थे वही आज हमें कोयला और प्राकृतिक तेल या गैस के रूप में हमें मिलते हैं जो कि आज की हमारी प्रतिदिन प्रयोग की वस्तुएँ हैं।
सूर्य से हमें दो रूपों में ऊर्जा प्राप्त होती है – पहला ऊष्मा के रूप में और दूसरा प्रकाश के रूप में। इस प्रकार से सूर्य से प्राप्त ऊर्जा का उपयोग बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है। सोलर फोटोवोल्टेइक सेल के माध्यम से सौर विकिरण को सीधे डीसी करेन्ट में परिवर्तित कर दिया जाता है। इस प्रकार, उत्पादित बिजली का उसी रूप में इस्तेमाल किया जा सकता या उसे बैटरी में स्टोर/जमा कर रखा जा सकता है। संग्रह किये गये सौर ऊर्जा का उपयोग रात में या वैसे समय किया जा सकता जब सौर्य ऊर्जा उपलब्ध नहीं हो। आजकल सोलर फोटोवोल्टेइक सेल का, गाँवों में घरों में प्रकाश कार्य, सड़कों पर रोशनी एवं पानी निकालने के कार्य में सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में सौर ऊर्जा का उपयोग पानी गर्म करने में भी किया जा रहा है।
लाभ
सौर ऊर्जा एक प्राकृतिक स्रोत प्राप्त होता है अतः यह निःशुल्क है और वर्षपर्यन्त पर्याप्त मात्रा में भी प्राप्त है। और सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह प्रदूषण रहित होता है।
हानि
ऋतुऋतु/मौसम में परिवर्तन होने पर सौर ऊर्जा की उपलब्धता प्रभावित होती है जिसके कारण यह हमें लगातार प्राप्त नहीं हो पाता। सबसे बड़ी कठिनाई यह है कि प्रारम्भ में ऊर्जा उत्पादन हेतु अत्यधिक निवेश की जरूरत होती है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें