रविवार, 29 अप्रैल 2012

ग्रामीण रोज़गार के लिए अक्षय ऊर्जा – महिलाओं का भविष्य जगमगाना



राजस्थान की सीमा पर, चार गाँवों में प्रकाश बल्बों द्वारा अंधेरी रातों को रोशन किया जाता रहा है। ये गाँव जो कि रेगिस्तान में छितराए हुए घरों से बने हैं, कभी पावर ग्रिड से नहीं जुड़े। अब उनके पास जो प्रकाश उपलब्ध है वह भारत सरकार तथा संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम परियोजना "ग्रामीण घरों के लिए अक्षय ऊर्जा" का हिस्सा है।
रात में, घर के आँगन में केवल एक बल्ब का तेज़ सफ़ेद प्रकाश ही इस सड़क या बगैर किसी उचित मार्ग के इस इलाके में घरों तक पहुँचने का मार्गदर्शक है। उल्लेखनीय बात यह है कि चार महिलाओं- प्रत्येक गाँव से एक- ने इन बल्बों को आमूलचूल रूप से तैयार किया है तथा उन्हें इनके रखरखाव व मरम्मत के लिए पैसा दिया जाता है।
यहाँ के परिवारों द्वारा इन चार महिलाओं को अपने ही समुदाय की सेवा के लिए 'नंगे पैर सौर इंजीनियर' के रूप में प्रशिक्षण की अनुमति के लिए अत्यधिक भरोसे तथा बारम्बार समझाइश देने की आवश्यकता रही। तिलानिया स्थित एनजीओ, सोशल वर्क एंड रिसर्च सेंटर (एसडब्ल्युआरसी), जिसने बाड़मेर में कार्यक्रम लागू किया, राजस्थान के अजमेर जिले में नंगे पैर सौर इंजीनियरों के लिए रहवासी प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करता है।
इन चार महिलाओं ने स्कूल में केवल कक्षा पांच या आठ तक पढ़ाई की है। इनमें से कोई भी कभी भी परिवार से दूर नहीं रही या किसी ने कभी पड़ोस के गाँव से आगे की यात्रा नहीं की। इन नंगे पैर सौर इंजीनियरों में से तीन विवाहित हैं, जबकि चौथी की सगाई हो चुकी है।
जबकि लोगों द्वारा कहा गया कि सिर्फ लड़कों को ही प्रशिक्षित किया जाना चाहिए, यह बताया गया कि परियोजना के अंतर्गत सिर्फ लड़कियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। लोगों को यह तथ्य स्वीकारने में काफी समय लगा। अंत में भगवती, सजनी, सलीमाती एवं चानो ने तिलोनिया में एसडब्ल्यूआरसी के परिसर में दो महीने बिताए तथा फील्ड प्रशिक्षण में एक महीना। इसके बाद इन्होंने अपने गाँवों में प्रत्येक लाईट व लालटेनों को तैयार किया तथा उनको स्थापित करने की प्रक्रिया का अवलोकन किया। अब वे गाँव में नियमित रूप से जांच करती हैं, शिकायतों का निराकरण करती हैं, खराब लाइटों को सुधारती हैं तथा उनको शक्ति प्रदान करने वाली बैटरियों का रखरखाव करती हैं।
युवा महिलाएं जो कुछ महीनों पहले तक अन्यों की ही तरह थीं - आँगन की सफाई करने वाली, पानी लाने वाली, खाना पकाने वाली- वे अब 'इंजीनियर' कहलाती हैं। जिन घरों में लाईट है, वे प्रत्येक घर गाँव के एक कोष में अपने हिस्से की राशि देते हैं जिसमें से उनकी नंगे पैर वाली महिला इंजीनियर को 1000 से 1500 रुपये प्रति माह तक वेतन दिया जाता है।

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